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समस्तीपुर में महिला सुरक्षा पर जोर, कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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समस्तीपुर, 25 मार्च 2026: महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर प्रशासन अब और अधिक सक्रिय होता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में समस्तीपुर जिला प्रशासन की ओर से बुधवार को कर्पूरी सभागार में एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का केंद्र बिंदु था—कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण से जुड़े कानूनों के प्रति जागरूकता फैलाना और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना।
कार्यक्रम का शुभारंभ उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सूर्य प्रताप सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के साथ ही उन्होंने इस विषय की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल तैयार करना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तब तक समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।
डीडीसी ने अपने संबोधन में कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई सशक्त कानून बनाए गए हैं, लेकिन उनकी जानकारी का अभाव एक बड़ी चुनौती है। अक्सर देखा जाता है कि पीड़ित महिलाएं अपने अधिकारों से अनजान रहती हैं, जिसके कारण वे न्याय पाने से वंचित रह जाती हैं। उन्होंने इस कार्यशाला को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों को इन कानूनों की गहराई से जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की शिकायत का निष्पक्ष और त्वरित समाधान किया जा सके।
कार्यशाला के दौरान विधि विशेषज्ञों और अधिवक्ताओं ने विस्तार से बताया कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की परिभाषा क्या है, किन-किन स्थितियों को इसके अंतर्गत शामिल किया जाता है और पीड़ित महिला किस प्रकार अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। उन्होंने यह भी समझाया कि शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सरल और गोपनीय बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है, ताकि पीड़िता बिना किसी भय के आगे आ सके।
इस अवसर पर ‘आंतरिक शिकायत समिति’ (आईसीसी) के गठन और उसकी भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि हर सरकारी और निजी संस्थान में इस समिति का गठन अनिवार्य है। यह समिति न केवल शिकायतों की सुनवाई करती है, बल्कि कार्यस्थल पर एक सुरक्षित माहौल बनाए रखने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाती है। समिति के सदस्यों को संवेदनशीलता के साथ मामलों को संभालने की सलाह दी गई, ताकि पीड़िता को किसी भी प्रकार की असुविधा या मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि यदि किसी संस्था में आंतरिक शिकायत समिति का गठन नहीं किया गया है, तो यह कानून का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही, दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और कानूनी दंड के प्रावधानों की भी विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यशाला में निवारण तंत्र को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि पीड़ित महिला को किस प्रकार की कानूनी सहायता मिल सकती है, उसे मानसिक और सामाजिक सहयोग कैसे प्रदान किया जाना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना क्यों जरूरी है कि उसे किसी प्रकार की प्रताड़ना या प्रतिशोध का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि कार्यस्थल पर जागरूकता अभियान चलाकर और नियमित प्रशिक्षण आयोजित कर ऐसे मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) सुनीता, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रजनीश कुमार राय और जिला पंचायत राज पदाधिकारी विष्णु देव मंडल सहित कई अन्य पदाधिकारी, अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला के दौरान उपस्थित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने कार्यालयों में इस अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, कर्मचारियों के बीच समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें, ताकि सभी को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की स्पष्ट जानकारी हो सके।
समापन सत्र में यह संदेश दिया गया कि महिलाओं के लिए भयमुक्त और सम्मानजनक कार्यस्थल का निर्माण ही इस कानून का मूल उद्देश्य है। इसके लिए प्रशासन, संस्थानों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। यदि हर स्तर पर संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाई जाए, तो निश्चित रूप से ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
इस तरह समस्तीपुर में आयोजित यह कार्यशाला न केवल कानून की जानकारी देने तक सीमित रही, बल्कि एक सुरक्षित और समानतापूर्ण कार्यस्थल की दिशा में सामूहिक प्रयास का संदेश भी दे गई। प्रशासन की यह पहल आने वाले समय में महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगी।

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